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क्या विकलांग के लिए दिव्यांग शब्द का प्रयोग उचित है?

सितम्बर 11, 2016

दिव्यांग

आपने पहले कभी –  यों कहें कि दो-तीन साल पह्ले तक – दिव्यांग शब्द सुना था? शायद नहीं सुना होगा। हो सकता है आपकी जानकारी में किसी व्यक्ति का नाम दिव्यांग हो। मैंने भी कुछ समय पहले तक इसे नहीं सुना था । संस्कृत के अपने न्यूनाधिक ज्ञान के कारण इस शब्द को अपरिचित नहीं कहूंगा। परन्तु जिस अर्थ में यह अब प्रचलन में आ गया है वह मेरे लिए नया है। नये अर्थ में इस शब्द से मेरा परिचय दो-ढाई साल पहले हुआ जब देश के प्रधानमंत्री मोदी जी का वाराणसी आगमन हुआ।

दरअसल 2014 की जनवरी माह की 22 तारीख को प्रधानमंत्री मोदी जी हमारे शहर वाराणसी (उनका संसदीय क्षेत्र) आए थे । यहां उन्होंने शारीरिक अथवा मानसिक रूप से असामान्य (अलौकिक नहीं) सामर्थ्य वाले लोगों के बीच उपयोगी उपकरणों/साधनों का वितरण किया। उसी सिलसिले में उन्होंने संबंधित व्यक्तियों के लिए दिव्यांग शब्द का प्रयोग किया। पहले ऐसे व्यक्तियों के लिए विकलांग शब्द का प्रयोग किया जाता था। किंतु मोदीजी द्वारा सुझाये इस नये शब्द को समाचार माध्यमों ने सोत्साह स्वीकार कर लिया।  आरंभ में मैंने देखा कि दिव्यांग के साथ-साथ विकलांग शब्द का प्रयोग भी समान रूप से हो रहा था, पर अब तो यही शब्द प्रचलन में आ गया है ऐसा लगता है। सरकारी दस्तावेजों में शायद यही मानक बन चुका है। मेरा अनुमान है कि शिक्षा और नौकरी-पेशे से जुड़ी संस्थाओं ने अब तक अपने फ़ॉर्मों में वांछित बदलाव कर लिया होगा।

अंगरेजी का हैंडिकैप्ड अर्थात् विकलांग

कोई व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक तौर पर सामान्य न होकर न्यूनाधिक अक्षम है इस बात को दर्शाने के लिए अंगरेजी में हैंडिकैप्ड (handicapped) शब्द प्रयोग में लिया जाता है। यह शब्द कब और कैसे व्यवहार में आया इस बाबत अंतर्जाल पर विविध स्रोतों से जानकारी उपलब्ध हो सकती है, उदाहरणार्थ snopes.com पर। यह शब्द प्रथमतः खेलों के संदर्भ में प्रयुक्त हुआ था। समय के साथ इसने नये अर्थ ग्रहण किए और आज यह शारीरिक/मानसिक लाभहीनता (disadvantage) की स्थिति के द्योतक के तौर पर प्रयुक्त होता है। कुछ लोग इसके लिए अंगरेजी में physically/mentally disabled शब्द प्रयोग में लेना पसंद करते हैं। अन्य़ लोग differently able का प्रयोग अधिक उचित समझते हैं।

हैंडीकैप्ड शब्द वस्तुस्थिति का समुचित द्योतक है और अभी तक प्रयोग में लिया जाता रहा है, फिर भी आजकल कईयों को यह अपमानजनक या अप्रिय लगने लगा है। तदनुसार अंगरेजी में वैकल्पिक शब्द व्यवहार में लिए जाने लगे हैं। मोदीजी की नजर में ठीक उसी तरह विकलांग शब्द अनुचित लगने लगा होगा, जिसके कारण उन्होंने नये शब्द “दिव्यांग” का प्रयोग अपने वाराणसी संबोधन में किया था। उनको लगता होगा कि हैंडीकैप्ड को दिव्यांग कहना सम्मान-द्योतक है। समाचार-पत्रों ने मोदी जी के इस भाषायी योगदान की जानकारी आम जन को दी, किसी ने निष्पक्ष भाव से तो किसी ने आपत्ति उठाते हुए। (उदाहरण के तौर पर देखें इकनॉमिक_टाइम्ज़ और द_न्यूज़_माइन्यूट।)

मैं नहीं जानता कि यह नया शब्द दिव्यांग उनके अपने दिमाग की उपज है या भाषाविदों ने उनको इसके प्रयोग की सलाह दी थी। अगर शब्दरचना उनकी अपनी है तो क्या किसी भाषाविद्‍ ने किसी प्रकार की आपत्ति नहीं की होगी? और यदि भाषाविदों ने ही इसे सुझाया हो तो ऐसा क्या सोच के किया होगा?

अनुपयुक्त शब्द दिव्यांग

मुझे इस पर संदेह नहीं कि यह शब्द सुन्दर, कर्णप्रिय और सम्मान-द्योतक है, परंतु जिस मुद्दे की बात की जा रही है उसके संदर्भ में अर्थपूर्ण नहीं लगता है। इससे वह अर्थ नहीं ध्वनित होते हैं जो शारीरिक अक्षमता को दर्शाता हो। मैं क्यों इस शब्द पर आपत्ति उठा रहा हूं इसे समझने के लिए संस्कृत के “दिव्” क्रियाधातु एवं “दिव्य” शब्द पर गौर करना होगा।  यहां पर मैं संस्कृत के शिव वामन आप्टे द्वारा रचित सुविख्यात संस्कृत-हिन्दी शब्दकोश के पृष्ठ 446-7 एवं हिन्दी के एक शब्दकोश के पृष्ठ 521 की प्रतियां प्रस्तुत कर रहा हूं।

ध्यान दें कि दिव् क्रियाधातु कई अर्थों में प्रयुक्त होती है, किंतु इससे व्युत्पन्न विशेषण दिव्य में इसका अर्थ स्पष्टतः चमकना या उज्ज्वल होना है। तदनुसार इस विशेषण शब्द के अर्थ हैं दैवी, स्वर्गीय, अलौकिक, उज्ज्वल, मनोहर, सुन्दर इत्यादि। कुल मिलाकर दिव्य उस विशिष्ठता को व्यक्त करता है जिसकी केवल कामना की जा सकती है, ऐसी विशिष्ठता जो देवताओं को उपलब्ध है, और जो सामान्यतः मनुष्य के लिए अप्राप्य है।  यह उस दोष का संकेतक नहीं हो सकता है जिससे मनुष्य मुक्त रहना चाहेगा, परंतु जिसका सामना उसे दुर्भाग्य से करना पड़ सकता है। गौर करें कि हिन्दी के शब्दकोश में भी कमोबेश यही बातें उल्लिखित हैं।

अपनी बात आगे बढ़ाऊं इससे पहले यह उल्लेख कर दूं कि दिव्यचक्षु शब्द अंधता से ग्रस्त (अंधे) व्यक्ति के लिए अवश्य इस्तेमाल होता है। परंतु ऐसा करने के खास कारण हैं ऐसा मेरा मानना है। इस तथ्य से सभी परिचित होंगे कि अंधे व्यक्तियों की अन्य ज्ञानेन्द्रियां सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक संवेदनशील होती हैं। कभी-कभी उनकी विशिष्ठ क्षमता को इंगित करने हेतु हम कहते हैं कि उनके पास छठी इंद्रिय है। मैंने उनके लिए प्रज्ञाचक्षु का प्रयोग भी सुना है।

परंतु अन्य प्रकार के शारीरिक/मानसिक दोषों से ग्रस्त जनों के मामले में उक्त प्रकार की बात लागू नहीं होती।

गंभीरता से सोचने पर यही निष्कर्ष निकाला जायेगा कि दिव्यांग उस व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होना चाहिए जिसका अंग अलौकिक हो, दैवी प्रकार का हो, जिसे पाने की कामना हर कोई करना चाहेगा। उक्त अर्थ के मद्देनजर दिव्यांग किसी का नाम रखा जा सकता है। दिव्यांगना तो अप्सरा के लिए प्रयुक्त भी होता है, और सभी जानते हैं कि अप्सराओं के सौन्दर्य की हम कैसी कल्पना करते हैं।

विकलांग के बदले दिव्यांग का प्रयोग सम्मानसूचक है महज इस कारण से उसके असली अर्थ को भुला देना चाहिए क्या? असल में विकलांग अंगरेजी के physically/mentally disabled का करीब-करीब समानार्थी है। जैसा पहले कहा गया है अंगरेजी में differently able भी प्रयुक्त होता है। उसी की तर्ज पर “भिन्नतः सक्षम” या उसी प्रकार के अन्य शब्द का प्रयोग किया जा सकता है। किंतु दिव्यांग का प्रयोग उसके अर्थ का अनर्थ करना ही समझा जायेगा।

मोदी जी का भाषायी योगदान

मोदी जी देश के 14वें प्रधानमंत्री हैं। उनकी कार्यशैली अपने पूर्ववर्ती 13 प्रधानमंत्रियों की तुलना में काफी भिन्न है। वे कई मानों में “फ़र्स्ट” होंगे। उनमें से एक है उनका भाषायी योगदान करना। नये-नये नारे गढ़ना, नये संयुक्ताक्षर सुझाना, पदबंधों की अपने तरीके से पुनर्व्याख्या करना, आदि उनकी खासियत है। मैं नहीं समझता कि किसी और प्र,मं. ने ऐसी महारत पायी हो या ऐसा करने का विचार उन्हें सूझा भी हो। इस दिशा में उनके “योगदान” का संक्षिप्त उल्लेख यहां पर करना समीचीन होगा:

(1) दिव्यांग तथा ब्रेन गेन – उपर्युक्त दिव्यांग शब्द के अतिरिक्त कितने और शब्दों का योगदान उन्होंने किया मुझे नही मालूम। मुझे वनइंडिया समाचार माध्यम पर उनके द्वारा दिया गया पद-बंध “ब्रेन गेन” (Brain Gain) देखने को मिला जो “ब्रेन ड्रेन” (Brain Drain) के ठीक उलट अर्थ वाली प्रक्रिया को दर्शाने के लिए सुझाया। अर्थात्‍ बौद्धिक कौशल वालों का विदेश गमन न हो, विपरीत उसके वे देश में ही टिकें और बाहर से लौट आवें। यह शब्द अर्थ तो रखता है, किंतु किसी ने कभी प्रयोग में लिया हो ऐसा लगता नहीं।

(2) नये नारे – मोदी जी ने नये-नये नारे गढ़ने में भी अपना कौशल दिखाया है। कुछ दृष्टांत ये हैं:

Make in India,  Skill India,  Digital India,  Start up India  

मोदी जी ने जब अपने पद की शपथ ली तो राजभाषा हिन्दी का प्रयोग बढ़े उत्साह से किया। यहां तक कि कई विदेशी मेहमानों के साथ दुभाषिये के माध्यम से वार्तालाप किया था। विदेशों में भी प्रायः हिन्दी में बोले। कालान्तर में उनका उत्साह ठंडा पड़ गया। उनका सुप्त अंगरेजी प्रेम अब जग चुका है। उनके नारे अब अंगरेजी में ही अधिक सुनने को मिलते हैं।

(3) नये सूत्र – मोदी जी ने राजनैतिक-सामाजिक व्यवस्था के संदर्भ में भी कुछ सूत्र सुझाए हैं, जैसे

Desire +Stability = Resolution

Resolution + Hard Work = Success

Indian Talent + Information Technology = India Tomorrow

जिसे संक्षेप में वे IT+IT=IT लिखते हैं।

(4) पदबंधों का संक्षिप्तीकरण – योजनाओं में निवेश के संदर्भ में PPP (Private, Public Partnership) को मोदी जी ने PPPP (People, Private, Public Partnership) में बदलकर आम आदमी के निवेश के समावेशन तक पहुंचा दिया। इसी प्रकार 3Ss (तीन S) = Skill, Scale, Speed अथवा Samaveshak, Sarvadeshak, Sarvasparshi की परिभाषा दे डाली। इसी प्रकार Pro People Good Governance के लिए संक्षेप P2G2 और Economy, Environment, Energy, Empathy and Equity के लिए  5Es (पांच E) भी उन्हीं के सुझाए हैं। ऐसे ही अन्य संक्षिप्ताक्षर भी मीडिया में खोजे जा सक्ते हैं। इन सबके अर्थों को मोदी जी ही ठीक-से समझते होंगे।

मोदी जी के ऐसे तमाम प्रयास लोगों को लुभा सकते हैं, मिथ्या दिलाशा दे सकते हैं, अथवा महज प्रमुदित कर सकते हैं। किंतु इनसे कोई जमीनी कार्य भी सिद्ध हो सकता है इसमें मुझे संदेह है।

जिस “दिव्यांग” शब्द से मैंने अपनी बातें प्रस्तुत की है वह प्रसंगोचित नहीं है यह में लेख-समापन पर दुबारा कहना चाहूंगा। योगेन्द्र जोशी

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