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मातृभाषा से दूर हो चुकने की अनुभूति

मई 21, 2014

मुझे बीबीसी-डॉट-कॉम पर उपलब्ध एक आलेख पढ़ने को मिला । लेखक हैं अमिताव कुमार और लेख का शीर्षक है “जब हिंदी पुरानी एंबेसैडर कार हो जाए” । लेखक वर्षों से अमेरिका में रहते हैं, न्यू यॉर्क के पास हडसन नदी पर स्थित एक छोटे-से शहर में । शहर के नाम का उल्लेख नहीं है । अपनी मातृभाषा से दूर रहने पर उस भाषा के संपर्क में यदाकदा आने पर कैसा लगता है इस प्रकार की बातें लेखक ने बयां की है । कदाचित पाठकगण भी लेख को पढ़ना चाहें । इसी आशय से यहां उसका संदर्भ प्रस्तुत है:

http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/05/140521_amitava_kumar_aa.shtml
– योगेन्द्र जोशी

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