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स्वतंत्र भारत की ‘महान उपलब्धि’ (?): मेट्रोहिंदी (एचईमिक्स) का बढ़ता दायरा

जून 22, 2012

‘इंडिया दैट इज भारत’ क्या वास्तव में स्वतंत्र हो पाया है ? यह ऐसा सवाल है जिसका उत्तर मैं ‘नहीं’ में पाता हूं । मेरी दृष्टि में अंग्रेजों द्वारा भारतीय राजनेताओं के हाथों में सत्ता का राजनैतिक हस्तांतरण कर दिये जाने की व्याख्या पूर्ण स्वतंत्रता के रूप में नहीं की जा सकती है । स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत तत्कालीन राजनेताओं ने आशा की थी कि राजनैतिक स्वतंत्रता के बाद कालांतर में यह देश अंग्रेजी एवं अंग्रेजियत से भी मुक्त हो जाएगा । परंतु ऐसा हो नहीं पाया ।

आज स्थिति यह है कि अंग्रेजी एवं अंग्रेजियत ने इस देश को पूरी तरह कब्जे में ले लिया है । मैं यहां पर अंग्रेजी के हिंदी पर पड़ रहे कुप्रभाव की बात कर रहा हूं । यों तो अंग्रेजी ने सभी भारतीय भाषाओं को विकृत कर डाला है, किंतु मेरी बात हिंदी तक सीमित रहेगी । इस देश में महानगरों में संपन्न, अंग्रेजी-शिक्षित एक ऐसा वर्ग उभर रहा है, जो स्वयं को हिंदीभाषी बताता है, किंतु जिसे हिंदी में वास्तविक रुचि रह नहीं गयी है । यह ऐसा वर्ग है जो हिंदी को अपनी मातृभाषा घोषित करता है, किंतु साफ-सुथरी हिंदी न तो बोल सकता है और न लिख सकता है । वह ऐसी भाषा बोलने लगा है जो हरगिज हिंदी नहीं कही जा सकती है । इस भाषा को हिंग्लिश कहना भी उचित नहीं होगा । इसे मैं ‘मेट्रोहिंदी’ अथवा ‘एचईमिक्स’ कहना चाहूंगा ।

मेट्रोहिंदी

इसका ‘मेट्रोहिंदी’ नामकरण मैं इसलिए करता हूं, क्योंकि यह मुख्यतया महानगरों, ‘मेट्रोसिटीज्’, के शिक्षित एवं संपन्न लोगों द्वारा प्रयोग में ली जा रही है । इसका प्रभावक्षेत्र निरंतर बढ़ रहा है । इसकी पहुंच छोटे शहरों से होते हुए कस्बों-गांवों तक के शिक्षित लोगों तक हो रही है । इस भाषा की खासियत यह है कि इसकी शब्दसंपदा में कितने अंग्रेजी शब्दों को शामिल किया जाएगा इस पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है । अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग वक्ता के अंग्रेजी ज्ञान एवं उसकी सुविधा पर निर्भर करता है । यहां तक कि उसका व्याकरणीय ढांचा भी आवश्यकतानुसार तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है और अंग्रेजी व्याकरण के अनुरूप ढाला जा सकता है । इस भाषा में अंग्रेजी के पदबंध (फ्रेज), वाक्यांश, एवं कभी-कभी पूरे वाक्य स्वीकार्य रहते हैं । इसी अर्थ में मेट्रोहिंदी को मैं विकल्पतः ‘एचईमिक्स’ भी कहता हूं, एचईमिक्स अर्थात् ‘हिंदी-इंग्लिश-मिक्स्चर’ । मैं इस भाषा को हिंग्लिश नहीं मानता, क्योंकि इसमें अंग्रेजी के शब्दों की ही बहुतायत नहीं है, बल्कि उसके आगे बहुत कुछ – जी हां बहुत कुछ – और भी है ।

मेट्रोहिंदी अभी औपचारिक रूप से स्थापित भाषा नहीं है । इसका अस्तित्व तो है, किंतु ऐसा लगता है कि अभी भाषाविदों ने इसका अध्ययन पारंपरिक हिंदी से भिन्न स्वयं में एक नई भाषा के तौर पर करने का प्रयास नहीं किया है । कदाचित् सभी भारतीय इसे हिंदी की ही आधुनिक बोली मानकर चलते हों । लेकिन मैं ऐसा नहीं समझता । हिंदी से मिलती-जुलती होने के बावजूद उर्दू एक अलग भाषा कही जाती है । ठीक वैसे ही मेट्रोहिंदी को हिंदी से मिलती-जुलती लेकिन उससे अलहदा भाषा माना जाना चाहिए ।

एक बानगी

मेट्रोहिंदी की क्या खासियत है और इसके उपयोक्ता कौन हैं इन पर अपना मत व्यक्त करने से पहले में एक बानगी पेश करता हूं । आजकल ब्राजील के दूसरे सबसे बड़े शहर रिओ द जनेरो (Rio de Janeiro) में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर विभिन्न राष्ट्रों के प्रतिनिधियों की बैठक चल रही है । निम्नलिखित अनुच्छेद मैंने New Scientist पत्रिका के वेबसाइट पर उक्त बैठक से संबंधित रपट (18 June 2012) से उद्धृत किया है । अंग्रेजी में इसका मूल पाठ यों है:

“The Earth Summit in this week is not looking promising. The conference will be devoid of the world leaders who attended its predecessor, 20 years ago. And there are no headline-grabbing treaties to sign. Its final declaration will not be binding to anyone. The main outcome will probably be to launch a set of “sustainable development goals” on issues like protecting forests, fisheries and water supplies.”

हिंदी संवाददाता, विषय-समीक्षक, अथवा प्रशासनिक प्रवक्ता, जो अंग्रेजी में ही कार्य करने का आदी हो चुका हो और जिसे साफसुथरी हिंदी के प्रयोग का अभ्यास ही न रह गया हो, उक्त अनुच्छेद को अंग्रेजीकृत ‘हिंदी’ (अर्थात् मेट्रोहिंदी) में कुछ यों प्रस्तुत करेगा:

“रिओ द जनेरो में चल रही इस वीक की अर्थ समिट प्रोमिसिंग नहीं लग रही है । इस कॉंफरेंस में उन वर्ल्ड लीडर्स की कमी रहेगी जिन्होंने 20 साल पहले इसका प्रिडिसेसर अटेंड किया था । और इसमें हेडलाइनलाइन-ग्रैबिंग ट्रीटीज साइन करने के लिए नहीं हैं । इसका फाइनल डिक्लेरेशन किसी के लिए बाइंडिंग नहीं होगा । संभवतः इसका मेन आउटकम फॉरेस्ट, फिशरीज्, एंड वाटर सप्लाइज् के प्रोटेक्शन के इश्यूज् पर “सस्टेनेबल् डिवेलपमेंट गोल्ज” पेश करना रहेगा ।”
(ध्यान दें कि अपने निजी टीवी चैनलों पर हिंदी समाचार प्रस्तुति कुछ ऐसी ही रहती है!)

यह हिंदी नहीं है । उसमें मौजूद अंग्रेजी शब्दों की अवांछित भरमार इसे उस व्यक्ति की समझ से बाहर कर देती है, जिसका अंग्रेजी ज्ञान पर्याप्त न हो । जो लोग अंग्रेजी के उक्त प्रकार के शब्द निर्लज्जता के साथ प्रयोग में लेते हैं उन्हें इस बात की परवाह नहीं रहती है कि ऐसी वैचारिक प्रस्तुति आम हिंदीभाषी की समझ से परे होगी । वह यह मानता है हर हिंदीभाषी को अंग्रेजी ज्ञान तो होना ही चाहिए । इसके विपरीत वह यह हरगिज नहीं मानता कि जब वह हिंदी बोलता है तब वह वास्तव में हिंदी ही बोले । अन्यथा हिंदी बोलने का नाटक न करके अंग्रेजी में बोले ।

जैसे अंग्रेजी समाचारों में आप हिंदी शब्दों को मनमरजी से नहीं ठूंसते, वैसे ही हिंदी समाचारों में अंग्रेजी शब्द महज इसलिए नहीं ठूंसे जा सकते हैं क्योंकि आपको हिंदी शब्द नहीं सूझते । इस तर्क को ध्यान में रखते हुए उक्त अनुच्छेद साफसुथरी हिंदी में कुछ ऐसे प्रस्तुत होना चाहिए:

“रिओ द जनेरो में चल रही इस सप्ताह का पृथ्वी सम्मेलन सफल होते नहीं लग रहा है । इस सम्मेलन में विश्व के उन नेताओं की कमी रहेगी, जिन्होंने 20 साल पहले इसके पूर्ववर्ती में भाग लिया था । और इसमें हस्ताक्षर करने के लिए समाचार-शीर्षक बनने योग्य समझौते भी नहीं हैं । इसका अंतिम घोषणापत्र किसी के लिए बाध्य नहीं होगा । संभवतः इसका मुख्य प्रतिफल वन, मत्स्यक्षेत्र, एवं जलापूर्ति के संरक्षण के मुद्दों पर “विकास के चिरस्थाई लक्ष्य” पेश करना रहेगा ।” (यह मेरा अनुवाद है; कदाचित् इससे बेहतर अनुवाद संभव हो ।)

मेट्रोहिंदी की वे खासियतें जो इसे आम हिंदी से अलहदा बनाती हैं, और वे कौन हैं जो इसे प्रयोग में ले रहे हैं इन बातों की चर्चा इस चिट्ठे की अगली प्रविष्टि में किया जाएगा । – योगेन्द्र जोशी

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One Response to “स्वतंत्र भारत की ‘महान उपलब्धि’ (?): मेट्रोहिंदी (एचईमिक्स) का बढ़ता दायरा”

  1. Hamarivani Says:

    आपके ब्लॉग पर लगा हमारीवाणी क्लिक कोड ठीक नहीं है और इसके कारण हमारीवाणी लोगो पर क्लिक करने से आपकी पोस्ट हमारीवाणी पर प्रकाशित नहीं हो पाएगी. कृपया लोगिन करके सही कोड प्राप्त करें और इस कोड की जगह लगा लें. क्लिक कोड पर अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित लिंक पर क्लिक करें.

    http://www.hamarivani.com/news_details.php?news=41

    टीम हमारीवाणी


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