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द्विभाषी/बहुभाषी होने के लाभ – न्यू साइंटिस्ट पत्रिका में उपलब्ध जानकारी

मई 11, 2012

 ‘एंग्लोस्फियर’ 

दो-चार दिन पहले मुझे ब्रिटेन से छपने वाली ‘न्यू साइंटिस्ट’ (New Scientist) नामक पत्रिका में एक लेख पढ़ने को मिला, जिसमें द्विभाषी अथवा बहुभाषी होने के लाभ की बातें कही गयी हैं । (newscientist.com, editorial dated 08 May 2012, New Scientist print version, issue 2863, page 3, related article page 30) पत्रिका में जिन प्रमुख बिंदुओं का जिक्र किया गया है उनकी चर्चा मैं इस स्थल पर कर रहा हूं । संपादकीय का शीर्षक हैः ‘Oh, to be bilingual in the Anglosphere’, और यह प्रत्रिका में अन्यत्र छपे एतद्विषयक अध्ययन पर लिखित शोध-प्रबंध पर आधारित है ।

पत्रिका का मानना है कि इस युग में अंग्रेजी मानवीय क्रिया-कलापों के बहुत-से क्षेत्रों में दुनिया भर में प्रयुक्त हो रही है । यह विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं चिकित्सा, व्यवसाय, राजनयिक कार्य, तथा सांस्कृतिक संपर्क-साधन आदि के क्षेत्रों में प्रमुख भाषाई माध्यम बन चुकी है । विश्व में तमाम लोग अंग्रेजी माध्यम से कार्य निष्पादन की क्षमता अर्जित कर चुके हैं । अंग्रेजी ने अपने लिए भाषाई प्रयोग का एक विस्तृत क्षेत्र निर्माण कर लिया है, जिसे ‘एंग्लोस्फियर’ (Anglosphere) नाम दिया है ।

द्विभाषी-बहुभाषी 

यूरोपीय देशों में द्विभाषियों की संख्या काफी है । वहां दो से अधिक भाषाएं जानने-बोलने वाले भी पर्याप्त संख्या में मिल जाएंगे । पत्रिका कहती है कि फ्रांस तक में दूसरी भाषा, मुख्यतया अंग्रेजी, के जानकार बहुत हैं । ध्यान रहे कि फ्रांस अपने भाषाभिमान और अंग्रेजी से परहेज के लिए जाना जाता है ।

यूरोपीय महाद्वीप के देशों के विपरीत ब्रिटेन तथा आयरलैंड में 70 फीसदी लोगों को किसी अन्य भाषा का कोई ज्ञान नहीं है । दरअसल उन देशों में जहां अंग्रेजी ही मुख्य रूप से मातृभाषा है वहां इस बात का अहंकार व्याप्त है कि जब अन्य भाषाभाषी अंग्रेजी सीखने के लिए बेताब हैं तो हम अन्य भाषा सीखने की मेहनत ही क्यों करें । इसमें दो राय नहीं है कि मातृभाषा के अलावा कोई और भाषा सीखना श्रम- एवं समय-साध्य तो होता ही है । इस बात को हर भारतीय अच्छी तरह अनुभव करता है कि हमारे कई बच्चों का समय तो अंग्रेजी सीखने में ही निकल जाता है और अन्य विषयों में नींव अपेक्षया कमजोर होती है ।

ब्रिटेन-आयरलैंड वाली स्थिति अंग्रेजीभाषी अन्य देशों में भी देखने को मिलती है । अमेरिका तक में केवल 25 प्रतिशत लोग ही किसी अन्य भाषा में बात कर सकते हैं । यह स्थिति तब है जब वहां अन्य मातृभाषा वाले समुदायों के लोगों की संख्या अच्छीखासी है, जिनमें स्पेनी बोलने वाले प्रमुख हैं । संपादकीय के अनुसार इस मामले में आस्ट्रेलिया की स्थिति और भी कमजोर है ।

गैर-अंग्रेजीभाषी देशों में अंग्रेजी सीखने के अपने किस्म के कारण हैं । वहां कुछ बच्चे तो बचपन में ही इसे सीख लेते हैं, तो बहुत-से लोगों को सीखने का अवसर बाद में मिलता है । कुछ भी हो, अंग्रेजी या अन्य भाषा सीखने के अपने कुछ अतिरिक्त लाभ भी हैं, जो मात्र एक ही भाषा जानने वालों को नहीं मिलते हैं ।

द्विभाषी होने का लाभ

पत्रिका में छपे शोध परिणामों के अनुसार द्विभाषी (या बहुभाषी) होना मस्तिष्क के लिए लाभदायक होता है । एक से अधिक भाषाओं को प्रयोग में लेने वाले व्यक्ति का मस्तिष्क अपेक्षया तीव्र, वस्तुस्थिति को बारीकी से समझने वाला, ध्यानस्थ होने में अधिक समर्थ, और विविध कार्य कर पाने में सक्षम होता है । अधिक महत्त्व की बात यह है कि चढ़ती उम्र के साथ बुजुर्गों में पाए जाने वाले मनोभ्रंश (dementia) के रोग की शुरुआत द्विभाषी होने पर कम से कम 5 वर्ष के लिए टल सकती है । एकाधिक भाषा का प्रयोग मस्तिष्क के लिए वस्तुतः एक कारगर व्यायाम है जो उसे तेज बनाता है । जिस प्रकार कायिक व्यायाम शरीर के अंगों को दुरुस्त रखने मदद करता है, वैसे ही दिमागी व्यायाम मस्तिष्क की सक्रियता बनाए रखने में समर्थ होता है ।

संपादकीय ने यह टिप्पणी भी की है अंग्रेजीभाषी देशों के लोगों को अंग्रेजी से इतर भाषा सीखने की न तो स्वयं कोई आवश्यकता दिखती है और न ही उन्हें इस दिशा में प्रेरित किया जा रहा है । बताया गया है कि शिक्षा के ‘ए’ स्तर को पार कर चुके (16 वर्ष) अतिरिक्त भाषा की कक्षाओं में प्रवेश के इच्छुक छात्रों की संख्या 1990 की तुलना में अब लगभग आधी रह गई है । कठिन प्रतिस्पर्धा वाले इस युग में वे लोग उस लाभ की स्थिति से वंचित रह सकते हैं, जो बहुभाषियों को प्राप्य है । – योगेन्द्र जोशी

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