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कतिपय परिभाषाएं (भाग 2): सप्ताह, सप्ताहांत, दिवस-नाम, ग्रह, एवं छायाग्रह

जनवरी 1, 2011

विगत 24 ता. (दिसंबर 2010) की ब्लॉग प्रविष्टि में शतक, शताब्दी, एवं सहस्राब्दि की परिभाषाओं पर मैंने अपना मत व्यक्त किया था । उसी क्रम में मैं सप्ताह, साप्ताहिक दिनों के नाम और उनसे संबद्ध ग्रहों एवं छायाग्रहों की चर्चा करने जा रहा हूं । इनकी बात करने से पूर्व अंग्रेजी में बहु-प्रचलित ‘द टीन्ज’ का उल्लेख कर लेना भी मुझे समीचीन लगता है, जिसे पिछली पोस्ट में शामिल किया जा सकता था ।

‘द टीन्ज’

अंग्रेजी में टीन्ज (teens) जममदेद्ध शब्द का भी बहुत महत्त्व है । यह मानव जीवन के उस काल को व्यक्त करता है जब व्यक्ति अवयस्कता से वयस्कता की ओर बढ़ता है । टीन्ज वस्तुतः 13 से 19 तक के अंतराल को इंगित करता है । इस समूह के इस नाम का आधार है इनमें ‘टीन्’ का विद्यमान् होना – थर्टीन्, फॉर्टीन्, … नाइन्टीन् (thirteen, fourteen, … nineteen) । किशोरों और उनसे कुछ अधिक अवस्था वालों के बारे में बात करते समय अंग्रेजी में इस शब्द का प्रयोग बहुतायत से होता है । इस वय के जनों को अंग्रेजी में टीनेजर पुकारा जाता है । किसी शताब्दी से संबंधित वर्षों के लिए भी यह प्रयुक्त हो सकता है । ‘ड्यूरिंग द टीन्ज आफ् द लास्ट सेंचुरी’ जैसे वक्तव्य संभव हैं । हिंदी में इसका समानार्थी शब्द कदाचित् नहीं है । शताब्द के संदर्भ में दूसरे दशक (11-20) से काम चल सकता है । उम्र के संदर्भ में टीन्ज के आरंभिक वर्षों के लिए किशोरावस्था (11 से 15 वर्ष) प्रयुक्त हो सकता है । उम्र के अलग-अलग पड़ाव दर्शाने के लिए अन्य शब्द भी हिंदी तथा अंग्रेजी में मिलते हैं, जैसे शैशवावस्था (infancy), बाल्यावस्था (childhood), युवावस्था (youth),प्रौढ़ावस्था (middle age), वृद्धावस्था (old age) मुझे इन शब्दों की स्पष्ट एवं असंदिग्ध व्याख्या देखने को अभी नहीं मिली है ।

सप्ताह, साप्ताहिक दिवस नाम

परिभाषा से सात दिनों के समाहार को एक सप्ताह कहा जाता है । जैसे एक वर्ष को महीनों और फिर तारीखों में बांटा गया है, वैसे ही सप्ताहों में भी बांटा जाता है । जैसे महीने के दिनों (तारीखों) को क्रमबद्ध संख्यात्मक नामों से जाना जाता है, वैसे ही सप्ताह के दिनों को ग्रहों से संबद्ध नामों से पुकारा जाता है (रवि, सोम/चंद्र, मंगल/भानु, बुध, गुरु/वृहस्पति, शुक्र, शनि; अंग्रेजी में Sun, Mon, Tues, Wednes, Thurs, Fri, Satur) । ये सभी सही मानों में ग्रह नहीं है । चंद्र पृथ्वी का उपग्रह कहलाता है, जब कि रवि अर्थात् सूर्य एक नक्षत्र या तारा (star) है और शेष उसके उपग्रह । कदाचित् सप्ताह की अवधारणा तब मानव विचार में आई होगी जब सभी ग्रहों का ज्ञान उसे नहीं हो पाया होगा । अन्यथा सप्ताह में दिवसों की संख्या अधिक होती, क्योंकि ग्रह तो और भी हैं । (सूर्य से निकटता के अनुसार क्रमशः बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, वृहस्पति, शनि, यूरेनस (वरुण), नेपच्यून (अरुण?), प्लूटो (यम) – जिसे अब ग्रह नहीं माना जा रहा है; Mercury, Venus, Earth, Mars, Jupiter, Saturn, Uranus, Neptune, Pluto)

जब ग्रहों की बात की जा रही हो तो छायाग्रहों का जिक्र करना समीचीन होगा । भारतीय ज्योतिष में नवग्रहों का उल्लेख मिलता है । (ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ग्रह हमारे जीवन की दशा-दिशा निर्धारित करते हैं । एक उक्ति भी हैः जामाता दशमो ग्रहः) सात ग्रह तो वही हैं जिनके नाम साप्ताहिक दिनों से संबद्ध हैं । दो अन्य ग्रह हैं राहु एवं केतु । ये दोनों वास्तव में भौतिक पदार्थ से बने आकाशीय पिंड नहीं हैं । ये तो असल में अमूर्त ज्यामितीय वस्तुएं मात्र हैं मैंने कभी यह सुना या पढ़ा था कि इन्हें छायाग्रह के नाम से भी जाना जाता है, किंतु इस नाम के प्रति में आश्वस्त नहीं हूं । वास्तव में ये सूर्य के परितः चक्रमण करती पृथ्वी की कक्षा या परिपथ के तल के साथ चंद्रमा के पृथ्वी के सापेक्ष परिपथ के अनुच्छेद ‘बिंदु’ हैं । मौलिक स्तर पर इन दोनों में कोई अंतर नहीं है । किसी एक को राहु तथा दूसरे को केतु माना जा सकता है । इनमें जो पृथ्वी से सूर्य की ओर हो वह सूर्यग्रहण का कारण और जो विपरीत दिशा में हो वह चंद्रग्रहण के लिए जिम्मेदार होता है, यदि वे कभी सूर्य-पृथ्वी को मिलाने वाली रेखा के संयोग से पर्याप्त निकट आ जाएं । राहु एवं केतु पृथ्वी के सापेक्ष सदैव विपरीत दिशाओं की राशियों में स्थित रहते हैं, जैसा हर जन्मकुंडली (horoscope) में देखने को मिलता है ।

कार्यदिवस, सप्ताहांत

मास के दिनों की संख्या असमान रखी गयी है, किंतु सप्ताह के दिन सुनिश्चित और केवल 7 हैं । मास एवं सप्ताह, दोंनों ही का अपना-अपना महत्त्व है । जिन क्षेत्रों में प्रतिदिन कामकाज नहीं होता है, जैसे सरकारी दफ्तरों में, वहां साप्ताहिक अवकाश का चलन है । शायद यह परंपरा सारे विश्व में अपनाई जाने लगी है । पाश्चात्य देशों में प्रायः सप्ताह के पांच दिन (सोम से शुक्र तक) कार्य होता है और इन्हें साप्ताहिक कार्यदिवस (week days) के नाम से जाना जाता है । उन देशों में बचे हुए दो दिन, शनि एवं रवि, आराम करने या बाहर घूमने-फिरने के रूप में देखा जाता है । इन्हें सप्ताहांत (weekend) की संज्ञा दी गयी है ।

साप्ताहिक कार्यदिवसों एवं सप्ताहांत की उपर्युक्त परिभाषा पूर्णतः स्थापित नहीं है । हमारे देश में आज भी कई क्षेत्रों में छः कार्यदिवसों वाली पुरानी परंपरा यथावत् चल रही है । इन क्षेत्रों के लिए सप्ताहांत का मतलब केवल रविवार से रह जाता है । सप्ताह का प्रथम दिन रविवार और अंतिम शनिवार मानने की परंपरा चली आ रही है । द्विदिवसीय सप्ताहांत की ऊपर दी गयी परिभाषा तर्कपूर्ण नहीं लगती है, कारण कि इसका शनिवार  तो बीत रहे सप्ताह का अंतिम दिन होता है, जब कि रविवार आने वाले सप्ताह का पहला दिन । इस प्रकार वे मिलकर एक ही सप्ताह का अंत नहीं कहे जा सकते हैं ।

अगली पोस्ट में ग्रिगॉरियन कलेंडर मास से इतर अपने देश में प्रचलित सौरमास एवं चांद्रमास की चर्चा की जाएगी । – योगेन्द्र जोशी

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