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अंगरेजी भाषा का संक्षिप्त ऐतिहासिक वृत्तांत; ओल्ड (पुरातन) से मिडिल (मध्यकालीन) होते हुए मॉडर्न (आधुनिक)

जनवरी 17, 2010

ओल्ड (पुरातन) इंग्लिश

जर्मन मूल की जातियों, जिन्हें क्रमशः ‘ऐंगल्ज’, ‘जूट्स’ एवं ‘सैक्सन्ज’ (Angles, Jutes, and Saxons) के नाम से जाना जाता है, ने उत्तर-पश्चिमी जर्मन क्षेत्र से करीब 450 ईसवी में इंग्लैंड पहुंचकर वहां अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया था । परस्पर कुछ भिन्नता के साथ वे जिन बोलियों को अपने साथ ले गये उन्हीं के सम्मिश्रण से ‘ऐंग्लो-सैक्सन’ (Anglo-Saxon) अर्थात् ‘ओल्ड इंग्लिश’ ने जन्म लिया था । इन जातियों के प्रभुत्व से इसी बोली ने वहां की जनभाषा का रूप ले लिया था । परस्पर आसानी से घुलमिल चुकी ये जातियां ‘इंग्लिश’ कहलाने लगीं । (ओल्ड इंग्लिश में वे Engle कहलाये तथा उनकी भाषा कही गयी Englisc) उनके पहुंचने से पहले वहां ‘सेल्टिक’ (Celtic) मूल की भाषा बोली जाती थी, किंतु संबंधित जातियों को उन्होंने आज के ब्रिटेन के ‘वेल्स’ (Wales) प्रांत की ओर धकेल दिया था । वेल्स में आज भी सेल्टिक मूल की वैल्श (Welsh) भाषा बोलने वाले लोग हैं (संख्या में अनुमानतः छः लाख, ब्रिटेन की जनसंख्या का करीब 1 फीसदी) । इन जातियों के पहले उस क्षेत्र पर रोमन सामाज्य का आधिपत्य था, 43 ईसवी पूर्व से 450 ईसवी तक । उनकी शासकीय भाषा लैटिन थी । कालांतर में रोमन कैथोलिक धर्म का भी प्रवेश वहां हुआ । कैथोलिक चर्च की धार्मिक रस्मों की भाषा लैटिन थी और यथावत् बनी रही । इस प्रकार आम जनभाषा ‘ऐंग्लो-सैक्सन’ (ओल्ड इंग्लिश) के साथ लैटिन की मौजूदगी भी वहां बनी रही, जिसके अनेकों शब्द उस दौर के इंग्लिश के अंग बन गये । इस भाषा पर ‘ओल्ड नॉर्स’ (Old Norse) कही जाने वाली स्कैंडिनेवियन (Scandinavian) भाषा का भी अच्छा-खासा प्रभाव रहा । उसके कई शब्द इस में अपनी जगह बनाये रहे । रोमन शासकों के साथ ग्रीक भाषा के शब्द भी उस ओल्ड इंग्लिश में प्रवेश पाने में समर्थ रहे । ग्रीक भाषा इंग्लैंड में कभी रही नहीं, किंतु रोमनों के माध्यम से इस भाषा को काफी प्रभावित किया । इसीलिए अंगरेजी में इन सभी भाषाओं के मूल वाले शब्दों की भरमार देखने को मिलती है । ओल्ड (पुरातन) इंग्लिश आज की अंगरेजी से एकदम अलग है; उसे देखकर कोई सोच नहीं सकता कि आरंभिक काल में अंगरेजी का स्वरूप इतना भिन्न था । एक बानगी पर गौर करें: “glæðne Hrōðgār, ac þæt wæs gōd cyning” (the grand Hrothgar, that was a good king) (æ=ae; ð=th; ō= o with overhead bar; ā= a with overhead bar; þ=th) ओल्ड इंग्लिश की आरंभिक लेखन प्रणाली ‘रूनों’ (runes) पर आधारित थी, जिसमें प्रमुखतया सीधी रेखाओं से बने लिपि-चिह्न प्रयुक्त होते थे । कालांतर में इसाई मिशनरियों के इंग्लैंड में प्रवेश पर ओल्ड इंग्लिश के लिए लैटिन अक्षरों के साथ-साथ सर्वथा नये कुछएक लिपिचिह्नों को चुना गया, और कइयों के साथ विशेषक चिह्नों (diacritic marks) का प्रयोग भी किया गया, जैसा उक्त उदाहरण में दिखता है । बाद के काल में इस भाषा एवं लिपि का सरलीकरण होता गया और आज हम उसे सर्वथा भिन्न स्वरूप में देखते हैं ।

मिडिल (मध्यकालीन) इंग्लिश

इंग्लैंड में ओल्ड इंग्लिश का राज करीब छः वर्ष तक सुचारु चलता रहा और फिर सन् 1066 में नॉर्मन कॉंकेस्ट के साथ उसकी अवनति का एक दौर आरंभ हुआ । उस वर्ष यूरोप महाद्वीप के नॉर्मेंडी (आज के फ्रांस के पश्चिमोत्तर में इंग्लिश चैनल के पास अवस्थित क्षेत्र) से ‘विलियम द कॉंकरर’ ने इंग्लैंड के राजसिंहासन पर कब्जा कर लिया । उसकी भाषा फ्रांसीसी थी और उसी के साथ फ्रांसीसी भाषा का इंग्लैंड में प्रवेश हुआ । फ्रांसीसी वहां के राजशाही, प्रशासन, तथा सामाजिक क्रियाकलापों की भाषा बन गयी । उसके बाद के अंगरेज राजाओं का झुकाव भी फ्रांसीसी की ओर रहा । जैसा कि आम तौर पर होता है, ऐसे अवसरों पर समाज का अभिजात, प्रतिष्ठित एवं शिक्षित वर्ग शासकों की भाषा अपनाने लगता हैं । यही इंग्लैंड में भी होने लगा । फलतः फ्रांसीसी अभिजात तथा शिक्षित वर्ग की भाषा बन गयी । ऐसा नहीं कि वे ओल्ड इंग्लिश भूल गये । अनुमान लगाया जा सकता है कि उनकी स्थिति कुछ वैसी ही रही होगी जैसे आज के भारत के अभिजात वर्ग की है, जा भारतीय भाषाएं जानते हैं, लेकिन व्यवहार में अंगरेजी को पहले चुनते हैं और भारतीय भाषाएं तब प्रयोग में लेते हैं जब अंग्रेजी से काम न चल रहा हो । ओल्ड इंग्लिश अब कम शिक्षित, पिछड़े एवं असंस्कृत समझे जाने वाले आम आदमी तक सीमित रह गयी, जिनकी संख्या निःसंदेह अधिक थी परंतु जो समाज में ताकत नहीं रखते थे । इस दौर में अंगरेजी का स्वरूप बदलता गया । जब तक कोई भाषा समाज के शिक्षित और सुसंस्कृत कहे जाने वाले वर्ग के हाथ में रहती है, तब उसके व्याकरण, शब्दोच्चारण, एवं वर्तनी में सरलता से विकार नहीं आ पाता है, किंतु जब वह समाज के सामान्य अनपढ़ या कम पढ़े तबके की भाषा बन के रह जाती है तो सरल से सरलतर स्वरूप अख्तियार करने लगती है । कुछ यही हाल अंगरेजी का उस काल में हुआ । फलतः तेरहवीं शताब्दि के मध्य तक वह परिवर्तित होकर मध्यकालीन ‘मिडिल इंग्लिश’ बन गयी, जिसका एक संक्षिप्त उदाहरण देखें: “And wel we weren esed atte beste” (And well we were treated with the best) लैटिन ही इस काल की अंगरेजी की लिपि बन गयी; उसके अन्य विशिष्ट अक्षर तथा विशेषक चिह्न गायब हो गये; और लैटिन के जो अक्षर ओल्ड इंग्लिश में अप्रयुक्त थे (यथा j, q, v) वे भी अब प्रयोग में आ गये । इंग्लिश, फ्रांसीसी तथा लैटिन की मौजूदगी से जुड़ी इस काल की भाषाई वास्तविकता इस कथन में देखिए: “A large amount of multilingualism resulted as the ruling minority spoke French, while Latin was used in the Church and emerging universities, and English was still spoken by the uneducated majority.” (अल्पसंख्यक शासक वर्ग के फ्रांसीसी बोलने, चर्च एवं स्थापित हो रहे विश्वविद्यालयों में लैटिन के प्रयुक्त होने तथा अशिक्षित अधिसंख्यकों के अंगरेजी इस्तेमाल करने के फलस्वरूप व्यापक बहुभाषावक्तृता अस्तित्व आई ।)

मॉडर्न (आधुनिक) इंग्लिश

शासकीय भाषा फ्रांसीसी के वर्चस्व को झेल रही अंगरेजी की प्रतिष्ठा में बदलाव तब आया जब इंग्लैंड का राजा ‘किंग जॉन’ 1204 में Normandy का प्रदेश फ्रांस के हाथों खो बैठा । तब आरंभ हुआ इंग्लैंड का फ्रांस के विरुद्ध लंबे काल तक चला संघर्ष । उस दौर में इंग्लैंडवासियों द्वारा फ्रांसीसी क्षेत्र में अर्जित भूस्वामित्व, व्यवसाय, आदि छोड़ने की भी नौबत आ गयी । उनके लिए अब फ्रांसीसी भाषा की अहमियत घटने लगी । इंग्लैंड में तो अधिसंख्य जन अंगरेजी ही जानते तथा बोलते थे । अतः यह काल अंगरेजी की पुनःस्थापना के लिए एक अच्छा अवसर बनकर आया । बीते समय में अंगरेजी इंग्लैंड और उसके बाहर व्यापक क्षेत्र में फैल चुकी थी, इसलिए वह भाषाई संपर्कसाधन का अच्छा माध्यम बन चुकी थी । इसके अतिरिक्त इस बीच लंदन और उसके आसपास मानक अंगरेजी का भी स्थापना हो चुकी था । हालत बदलने लगे और चौदहवीं सदी के अंत तक (1350-1380) फ्रांसीसी के बदले अंगरेजी शिक्षा का माध्यम बन गयी । सामाजिक वास्तविकता को देखते हुए वह 1362 में राज-दरबार की भाषा भी घोषित हो गई । ज्ञातव्य है कि 1399 में सिंहासन पर बैठने वाला किंग हेनरी चतुर्थ (King Henry IV) इस काल का पहला राजा था जिसकी मातृभाषा अंगरेजी थी । पंद्रहवीं शताब्दि के आंरभ तक लंदन की अंगरेजी मानक, सर्वस्वीकार्य, सशक्त तथा साहित्यिक भाषा के तौर स्थापित हो गयी । और इसके साथ आरंभ हुआ ‘मॉडर्न’ या आधुनिक अंगरेजी का युग । – योगेन्द्र जोशी ——— उपरिलिखित जानकारी के आधार-स्रोत: http://french.about.com/od/vocabulary/a/frenchinenglish.htm http://en.wikipedia.org/wiki/History_of_English http://www.orbilat.com/Influences_of_Romance/English/RIFL-English-French-The_Domination_of_French.html http://www.chass.utoronto.ca/~cpercy/courses/6362DiGiovanni1a.htm The Languages of the World by Kenneth Katzner (Routledge – Taylor & Francis Group, London/New York, 2003)

6 Responses to “अंगरेजी भाषा का संक्षिप्त ऐतिहासिक वृत्तांत; ओल्ड (पुरातन) से मिडिल (मध्यकालीन) होते हुए मॉडर्न (आधुनिक)”

  1. उन्मुक्त Says:

    अच्छी सूचना है।


  2. इस उत्तम लेख के लिये साधुवाद! आपका यह लेख हिन्दी जगत के पाठकों के लिये बहुतुपयोगी होगा।

    किन्तु क्या आपको नहीं लगता कि ‘ओल्ड’, ‘मिडिल’ और ‘मौडर्न’ के स्थान पर उपयुक्त हिन्दी शब्द लिखे जाने चाहिये थे? अधिक से अधिक कोष्टक में रोमन या देवनागरी में इन्हें भी लिखा जा सकता था।

  3. रवि Says:

    आपके तमाम लेख विचारपूर्ण और शोघपूर्ण हैं. यदि आप चिट्ठे की बाजू पट्टी में तमाम लेखों के शीर्षक दिखाता कोई विजेट या सूची लगा दें तो पाठकों को आलेखों को ढूंढ कर पढ़ने में बेहद सहायता मिलेगी.

  4. karuna gupta Says:

    aalekh bahut santulit hai.sanchep main puri jankari mi
    lti hai.english language ka pahla sahityakar kise mante hain jaisa hindi main bhartendu ko.


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