Home

Tirumala Tirupati Devasthanam

श्री बेंकटेश्वर बालाजी के दर्शनार्थ मैं तिरुमल पहली बार नौ-दस वर्ष पहले गया था (देखें ब्लॉग ‘पेज’ प्रविष्टि बालाजी मंदिर, तिरुमल) । तब वहां ब्रह्मोत्सवम् की धूमधाम थी ।  यह उत्सव शारदीय नवरात्र (आश्विन मास – सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर – के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तिथि तक का नौदिवसीय कालखंड) में आयोजित होता है । इस मौके पर यहां पर बेतहासा भीड़ रहती है और बालाजी के दर्शन दुर्लभ हो जाते हैं यदि आपने पूरी व्यवस्था अग्रिम तौर सुनिश्चित न कर रखी हो । मुझे ऐसा कुछ मालूम नहीं था । मेरी पत्नी तथा मैं अपराह्न में वहां पहुंचे थे । अगला पूरा दिन तिरुमल के नाम हमने रखा था और तीसरे दिन अपराह्न में हमारी वापसी यात्रा का आरक्षण था । वहां पहुंचने पर पता चला कि अगले पांच-छः दिन तक दर्शन-टिकट आरक्षित हो चुके थे । हमारी चिंता वहां ठहरने और दर्शन की व्यवस्था थी । हमारी तरह और भी कई लोग देश के विभिन्न कोनों से वहां पहुंचे थे । कोई बंगाल से, कोई महाराष्ट्र से और कोई सुदूर उत्तर भारत से । सर्वत्र अफरातफरी फैली थी और दुर्भाग्य से समुचित जानकारी कहीं ठीक-से मिल नहीं पा रही थी । पूरे परिसर में भीड़ थी, कोई कहीं बैठा है तो कहीं कोई लेटा है । सामान रखने के लिए लॉकर तथा रात्रिनिवास हेतु कमरों के लिए देवस्थानम् में लंबी-लंबी पंक्तियां लगी हुई थीं, और पता नहीं चल पा रहा था कि स्थिति वस्तुतः क्या है । ऐसे में सभी दर्शनार्थी परस्पर एक-दूसरे से जानकारी लेते और उसे बांट रहे थे । ब्रह्मोत्सवम् पर प्रज्वलित विद्युत्‌-बल्बों से निर्मित देवता की रेखाकृतियांब्रह्मोत्सवम् पर प्रज्वलित विद्युत्‌-बल्बों से निर्मित देवता की रेखाकृतियां

उस अवसर पर मैंने ध्यान दिया कि वहां पहुंचे तीर्थयात्रियों में अधिकांश ऐसे थे जो अंग्रेजी के आदी नहीं थे, या कहा जा सकता है कि उसके प्रयोग में सहजता नहीं अनुभव करते थे । यद्यपि वे सभी हिंदीभाषी रहे हों ऐसा नहीं, फिर भी परस्पर वार्तालाप में हिंदी का ही प्रयोग प्रमुखतया कर रहे थे । वे मूलतः अहिंदीभाषी थे और हिंदी में प्रवीण नहीं थे यह तथ्य उनके बोलने के लहजे और भाषाई अशुद्धता से साफ पता चल रहा था । तथापि सभी का हिंदी से बखूबी काम चल रहा था । ऐसी बात थी यात्रिकों के साथ, किंतु देवस्थानम् के कार्यालयों में अंग्रेजी ही मददगार सिद्ध हो रही थी यह कहना पड़ेगा । छपी हुई जानकारी तेलुगू तथा हिंदी में मिल रही थी, पर अंग्रेजी ही प्रचलन में मुख्यतः देखी जा सकती थी । परिसर में यत्रतत्र लगे सूचनापट्ट एवं मार्गदर्शक संकेत अंग्रेजी तथा तेलुगू में थे न कि हिंदी में भी । ऐसी बात देश में प्रायः सभी जगह है ।

शेष के लिए यहां >> क्लिक करें