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शंका समाधन: ‘long’, ‘song’ आदि का लिप्यंतरण कैसे हो?

अक्टूबर 30, 2008

गूगल (Google) की वेबसाइट पर हिन्दी-ग्रूप उपलब्ध है (पताः hindi@googlegroups.com), जिसके साथ उसके सदस्यगण पत्राचार कर सकते हैं, और हिन्दी संबंधी अपने समस्याओं, शंकाओं, सुझावों आदि की चर्चा कर सकते हैं । एक सदस्य होने के नाते मुझे वहां से ईमेल मिलती रहती हैं । हाल में मुझे भी एक ईमेल मिली जिसमें सवाल था:
“हिन्दी में ‘long’, ‘song’ आदि को कैसे लिप्यंतरित किया जाता है?”

मैं इस सवाल पर गंभीर नहीं था, अतः उस पर ध्यान देते हुए मैंने कोई सुझाव या प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की । हां, कुछ सदस्यों के तत्संबंधित विचारों पर अपनी नजर डालता रहा । उक्त अंग्रेजी शब्दों को कैसे लिखा जाये इस पर विभिन्न मत देखने को मिल रहे थे, यथा इन्हें ‘लॉन्ग, सॉन्ग’ अथवा ‘लॉङ्ग, सॉङ्ग’ लिखा जाये जैसी बातें कही गयी थीं ।

मैं दिये गये सुझावों से सहमत नहीं हो सका । मैं तो यही समझ रहा था कि इन शब्दों को ‘लॉङ्, सॉङ्’ लिखा जाना चाहिए इस बात में तो शंका होनी ही नहीं चाहिए । यहां ‘ला, सा’ के ऊपर अंकित अर्धचंद्राकार चिह्न (ऑ की मात्रा, जो हिन्दी के चंद्रबिंदु ँ से भिन्न है) अंग्रेजी के ‘औ’ के समान स्वर-ध्वनि के लिए कई जन प्रयोग में लेते हैं । चूंकि विभिन्न क्षेत्रों के अंग्रेजीभाषी उक्त शब्दों में विद्यमान वर्ण ‘o’ का एकसमान उच्चारण नहीं करते हैं (जैसे उत्तरी अमेरिका में यह ’आ’ के सन्निकट प्रतीत होता है), अतः कुछ लोग इन शब्दों को ‘लाङ्, साङ्’ लिखना ठीक समझेंगे, या फिर ’औ’ की ध्चनि को स्वीकारते हुए ‘लौङ्, सौङ्’ लिखना पसंद करेंगे । लेकिन मेरे मत में किसी भी प्रकार से इन शब्दों के हिन्दी वर्तनी में ‘ग’ शामिल नहीं किया जा सकता है । ऐसा इसलिए कि उनके उच्चारण में ‘ग’ की ध्वनि विद्यमान ही नहीं है ।

मुझे लगा कि इस बारे में अधिक विस्तृत चर्चा करना समीचीन होगा । कदाचित् कुछएक तथ्य पाठकों को रोचक एवं उपयोगी लगें । इसीलिए मैं अपने विचार यहां लिखने बैठा ।

सबसे पहले यह स्वीकारना वांछित होगा कि अंग्रेजी ध्वन्यात्मक (phonetic) भाषा नहीं है, अतः इसके शब्दों की वर्तनी (spelling) तथा उनसे संबद्ध उच्चारण में असंदिग्ध संबंध नहीं रहता है । वर्तनी देखकर उच्चारण का अनुमान तो लग सकता है, परंतु वह ठीक-ठीक तदनुसार ही होगा यह नहीं कहा जा सकता है । अतः अनुभव एवं अध्यास से लोगों को वर्तनी तथा उच्चारण, दोनों, सीखने पड़ते हैं ।

दूसरी तरफ भारतीय भाषाओं की लिपियां ध्वन्यात्मक (phonetic) हैं, अर्थात् उनमें लिखित लिपिचिह्नों और संबंधित उच्चारण में अनन्य संबंध रहता है । अतः जैसा बोला जाये वैसा ही लिखा जाये का सिद्धांत उन पर लागू होता है । यह अवश्य है कि प्रायः सभी भाषाओं में उच्चारण-दोष पाया जाता है और तदनुरूप उनमें वर्तनी संबंधित विकार यदा-कदा देखने को मिल जाता है । अथवा लिखा तो सही जा रहा हो, किंतु बोला गलत जाये यह हो सकता है । तब इसे अपवाद के तौर पर ही देखा जा सकता है । हिन्दी उच्चारण दोष से मुक्त नहीं । मेरी दृष्टि में प्रमुख उदाहरण हैं: (1) ‘ऋ’ का उच्चारण ‘रि’ की भांति करना, (2) विसर्ग के सही उच्चारण का ज्ञान न होना और फलस्वरूप ‘अतः’ को ‘अतह्’ की भांति बोलना, (3) ‘ज्ञ’ को ‘ग्य’ की तरह उच्चारित करना, (4) ‘ण’ का ठीक-ठीक उच्चारण न कर पाना, और (5) ‘श’ एवं ‘ष’ में भेद न कर पाना, आदि । यहां इतना कहना चाहूंगा कि मेरे मत में संस्कृत पूर्णतः ध्वन्यात्मक है और जैसा कि उसके नाम के अर्थ हैं, उसमें विकृत उच्चारण की अनुमति नहीं है ।

आरंभ में उल्लिखित प्रसंग के संदर्भ में अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए मैं अंग्रेजी के ‘फ़ोनेटिक’ शब्दकोष का सहारा लेता हूं । इन शब्दोंकोशों से आम लोगों का परिचय कम ही देखने को मिलता है । ये शब्दकोष शब्दों की वर्तनी और उनसे संबंधित उच्चारण (शब्दार्थ के बिना) का विवरण स्वरघ्वनि (फ़ोनीम) की विशिष्ट लिपि में प्रदान करते हैं । (फ़ोनेटिक चिह्नों की जानकारी http://www.ipa.webstuff.org/ तथा http://esl.about.com/library/weekly/aa040998.htm पर मिल सकती है ।) यदि आप ऐसे किसी शब्दकोष की मदद लें तो पायेंगे कि ‘long’, ‘song’ का उच्चारण यूं किया गया है:
lɔŋ, sɔŋ

यहां ɔ उस स्वर ध्वनि (कुछ के मतानुसार ‘औ’ के सन्निकट तथा दूसरों की राय मे ‘आ’ जैसा) को व्यक्त करता है जिस पर मैं प्रश्न नहीं उठा रहा हूं । ŋ वह अनुनासिक (nasal) व्यंजन ध्वनि है जो उन तमाम शब्दों में देखने को मिलती है जिनकी वर्तनी में ‘ng’ मौजूद रहता है । वस्तुतः यह वही घ्वनि है जो संस्कृत के वर्णमाला के ‘कवर्ग’ का अनुनासिक व्यंजन वर्ण ‘ङ’ व्यक्त करता है । ध्यान दें कि उच्चारण में ‘g’ शामिल नहीं है जो ‘ग’ की ध्वनि व्यक्त करे, अर्थात् शब्दकोष इनकी घ्वनि lɔŋg, sɔŋg नहीं दर्शाता । जहां कहीं भी ‘ङ’ के पश्चात् ‘ग’ की घ्वनि होगी वहां ‘g’ स्पष्टतः लिखा मिलेगा । इस बात को स्पष्ट करने के लिए मैं उदाहरण-स्वरूप इन दो शब्दों को लेता हूं:
finger तथा singer
दोनों की वर्तनी में आरंभिक वर्णों (f तथा s) के अलावा कोई अंतर नहीं, किंतु इनके उच्चारणों में स्पष्ट भेद है, जो क्रमशः यूं व्यक्त किये जाते हैं:
fiŋgə तथा siŋə
जिनमें ‘f’, ‘s’, ‘i’ तथा ‘ə’ क्रमशः ‘फ़’, ‘स’, ‘इ’, एवं ‘अ’ की घ्वनि व्यक्त करते हैं । ध्यान दें कि जहां पहले में ‘ग’ घ्वनि विद्यमान है वहीं दूसरे में वह नहीं है । जाहिर है कि ’singer’ को ‘सिङर’ के बदले ‘सिङ्गर’ उच्चारित करना गलत है, और ‘फिङ्गर’ को ‘फिङर’ नहीं बोला जा सकता है । (लेकिन व्यक्तिनाम Singer को ‘सिङ्गर’ ही बोला जाता है!)

वस्तुतः ‘sing’ से बने सभी शब्दों यथा ‘sang’, ‘sung’, ‘singer’, एवं ‘singing’ में ‘ग’ की ध्वनि कहीं नहीं । इस बात पर गौर करें कि क्रिया धातुओं से ‘ing’ जोड़कर बनाये गये क्रियापदों के उच्चारण में ‘ग’ नहीं रहता और तदनुसार यह प्रत्यय (suffix) ‘फ़ोनेटिक डिक्शनरी’ में ‘iŋ’ (न कि ‘iŋg’) से दर्शाया गया मिलेगा । इस पर भी ध्यान दें कि मानक अंग्रेजी में ‘r’ का स्पष्ट उच्चारण सदैव नहीं किया जाता है, बल्कि उसे ‘अ’ की भांति बोला जाता है । ऐसा विशेषतया शब्दांत ‘r’ और प्रायः किसी व्यंजन के पूर्व लिखित ‘r’ के साथ होता है । उदाहरणार्थ ‘car, durt, more, never’ का उच्चारण क्रमशः करीब-करीब ‘काअ, डअट, मोअ, नेवअ’ की तरह किया जाता है , किंतु ‘arise, during, running, road’ का उच्चारण क्रमशः ‘अराइज़्‌, ड्यूरिङ्, रनिङ्, रोड’ ही होता है । यह अलग बात है कि वर्तनी में मौजूद ‘r’ को प्रायः सभी भारतीय स्पष्टतः ‘र’ बोलते हैं ।

विशेषण शब्द ‘long’ के मामले में स्थिति कुछ भिन्न है । यद्यपि इसके उच्चारण में ‘ग’ घ्वनि नहीं है, परंतु इससे प्राप्त शब्दों ‘longer, longest’ में ‘ग’ की घ्वनि रहती है (लॉङ्गर, लॉङ्गिस्ट ) । दूसरी ओर क्रिया ‘long’ (चाहत रखना) से बने शब्दों के साथ ऐसा नहीं (जैसे ‘longing’ = लॉङिङ, लॉङ्गिङ्ग नहीं) ।

शब्दार्थ के लिए प्रयुक्त होने वाले शब्दकोशों में प्रायः उच्चारण का संकेत भी मिलता है, पर उसे दर्शाने के कोई मानक पद्धति नहीं है । अधिकांशतः सभी अपनी-अपनी पद्धति का विवरण देते हैं । मैंने आम तौर पर पाया है कि ये शब्दकोश ‘ङ’ की ध्वनि के लिए ‘ng’
प्रयोग में लेते हैं और यदि उसके साथ ‘ग’ की ध्वनि भी हो तो उसे ‘ngg’ से दर्शाते हैं ।

इतना सब इस बात पर जोर डालने के लिए कहा गया है कि अंग्रेजी वर्तनी देख भर लेने से देवनागरी में उसकी वर्तनी सही-सही नहीं लिखी जा सकती है जब तक कि उसके सही उच्चारण पर ध्यान न दिया जाये । इस संदर्भ में संस्कृत वर्णमाला की विशिष्टता का किंचित् ज्ञान उपयोगी सिद्व हो सकता है । इस विषय पर कुछ और अगले लेख में । – योगेन्द्र

2 Responses to “शंका समाधन: ‘long’, ‘song’ आदि का लिप्यंतरण कैसे हो?”

  1. Anunad Singh Says:

    आपकी राय बहुत तर्कसम्मत लगी!


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