Home

हिन्दी दिवस, 14 सितम्बर

सितम्बर 14, 2008

आज हिन्दी दिवस है । आज ही के दिन सन् 1950 में हिन्दी इंडियन यूनियन अर्थात् भारतीय संघ की राजभाषा अधोलिखित शब्दों में घोषित की गयी थीः-

(संघ की राजभाषा नीति ) –
संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है । संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतराष्ट्रीय रूप है [संविधान का अनुच्छेद 343 (1)] । परन्तु हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा का प्रयोग भी सरकारी कामकाज में किया जा सकता है (राजभाषा अधिनियम की धारा 3) । …

तब से हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है । उस काल से अब तक इतना समय बीत चुका है जिसमें दो पीढ़ियां गुजर चुकी हैं, किंतु इस राजभाषा की स्थिति कमोबेश अपरिवर्तित है । इतना समय बहुत होता है किसी देश में सार्थक परिवर्तन के लिए ।

इस दिवस को लेकर मेरे मन में तमाम शंकाएं उभर आती हैं । मैं समझ नहीं पाता कि किसी दिवस को मनाने का क्या मकसद होता है । वर्ष भर हम तरह-तरह के दिवस मनाते रहते हैं, कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिवस तो कभी राष्ट्रीय स्तर के, कभी स्थानीय एवं सामुदायिक महत्त्व के तो कभी केवल पारिवारिक एवं सुहृदों तक सीमित । हर एक का अपना प्रयोजन है ऐसा दावा किया जाता है । पर क्या सच में सदैव कोई सार्थक प्रयोजन होता है ? और उस सार्थकता का कितना एहसास रहता है लोगों को ?

लोग जन्मदिन मनाते हैं, और मैं उसके पीछे का प्रयोजन समझ सकता हूं । हम सामूहिक तौर पर इस बात की खुशी मनाते हैं कि अमुक व्यक्ति ने जीवन के सफर का एक और साल सही-सलामत बिता लिया है, कि व्यक्ति के अनुभवों की पिटारी कुछ और भर गयी है, कि व्यक्ति परिवार एवं समाज के सापेक्ष अधिक दायित्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए तैयार हो चुका है, आदि आदि । समझ में आता है ।

कुछ यही बात दिवंगत आत्माओ से जुड़े दिवसों की भी है । देश एवं समाज के प्रति अपने समय में उनके द्वारा किये गये कार्यों का हम स्मरण करते हैं और उनका आभार मानते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं । विभिन्न समाजों में इस प्रकार की परंपराएं देखने को मिल जाती हैं । हिंदू समाज में तो पितरों को स्मरण करने के लिए श्राद्धों की परिपाटी है ।

हम विविध प्रकार के उत्सव भी मनाते रहते हैं । वे भी एक प्रकार के दिवस ही हैं । किसी जमाने में जब लोग आजकल की जैसी व्यस्तता और आपा-धापी से मुक्त थे तो उत्सवों के माध्यम से रोजमर्रा की एकरसता को तोड़ते थे । ये उत्सव मनोरंजन के साधन होते थे और लोगों के सामुदायिक जीवन के परिचायक भी । अब लोगों को फुरसत कम ही रहने लगी है । फिर भी उनको मनाने की औपचारिकता निभाई ही जाती है । नये उत्सव और उनको मनाने के नये अंदाज भी हालिया वर्षों में लोगों ने इजाद कर डाले हैं ।

इस प्रकार के सभी दिवस किसी ध्येय की याद दिलाने के लिए नहीं मनाये जाते हैं । परंतु कुछ दिवस ऐसे होते हैं जिनको मनाने के पीछे कोई ध्येय नियत रहता है । अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (21 फरवरी), उपभोक्ता अधिकार दिवस (15 मार्च), विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल), पृथ्वी दिवस (22 फरवरी), गरीबी उन्मूलन दिवस (17 अक्टूबर), मानवाधिकार दिवस (10 दिसंबर), तथा किसान दिवस (23 दिसंबर) जैसे सैकड़े से भी अधिक तमाम दिवस आजकल अंतरराष्ट्रीय अथवा राष्ट्रीय स्तर पर मनाये जाते हैं । इनमें से तो कुछेक का जिक्र तक सुनने को नहीं मिल पाता है । कुछ भी हा,े ये वे दिन नहीं हैं जब मिठाइयां बांटी जायें, पठाखे छोड़े जायें और लोग आपस में मिलें तथा परस्पर बधाई दें । ये वे दिन हैं जब हमें वस्तुस्थिति का आकलन करना होता है, देखना होता है कि हम घोषित उद्येश्य की दिशा में कितना आगे बढ़े हैं, हमारी कमियां क्या रही हैं और अब आगे क्या करना है, इत्यादि । ऐसे दिन संकल्प लेने के होते हैं, जश्न मनाने के लिए नहीं । क्या हिन्दी दिवस के मौके पर ईमानदारी से इन प्रश्नों पर विचार होता है ? साल के इस एक दिन (14 सितंबर) हम हिन्दी को याद करते हैं, जैसे कि वह उसका जन्मदिन हो, और दे बैठते हैं लछ्छेदार भाषण, वही घिसीपिटी बातें हर साल दुहराते हुए । और फिर जुट जाते हैं यथास्थिति बनाये रखने में ।

क्या ऐसे दिवस मनाने से न मनाना बेहतर नहीं होगा ? शेष बातें बाद में । बहरहाल इस स्तम्भ की शुरुआत मैं इसी दिन से कर रहा हूं । — योगेन्द्र ‘मिथ्याभाषी’

Advertisements

2 Responses to “हिन्दी दिवस, 14 सितम्बर”

  1. विनय Says:

    आपके ब्लॉग पर आकर काफ़ी जानकारी मिली, ऐसे ही लिखते रहिए!

    धन्यवाद

  2. Prashant Panditrao Jadhav Says:

    bahut aachi jankari aur sachhi stithi batai hai, dhanyawad….


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: